Friday, April 1, 2016

भगवान के भरोसे मै, आप और भारत

अभी कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ में भारतीय सेना के सात जवानों को नृशंसता से मार गिराया. नक्सलियों ने तो उन जवानों की आँखें भी फोड़ दीं.
३१ मार्च २०१६ को दिन के समय में कोलकाता के भीड़ भरे बाज़ार में एक फ्लाई ओवर गिर गया जिसमे कम से कम ३० लोगों की मृत्यु हो गई और कई घायल हो गए.
पर भारतवासियों मे  अफ़सोस की लहर ३१ मार्च की रात करीब ११ बजे दौड़ी. ये अफ़सोस वास्तव में दिल से किया जाने वाला अफ़सोस था. कईयों की आँखों में तो आँसू आ गए.
ये लाज़मी भी था.
इसी समय भारत ने वेस्ट इंडीज़ के हाथों टी ट्वंटी का सेमी फाइनल जो गंवाया था.
ये सब देखने के बाद मुझे लगा कि फ्लाई ओवर गिरने के बाद इसे बनाने वाली कम्पनी के मालिकों ने अगर ये बयान दिया कि ये तो 'भगवान की मर्जी' थी तो उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा.
एक 'ब्लैक लिस्टेड' कम्पनी आराम से अपना काम कर रही थी. हर कुछ वर्ष बाद ये अपने पहले से बताए गए लागत के अनुमान को बढ़ा देती थी और नया बिल पास भी करवा लेती थी. न तो इसे ठेका देने से पहले सोचा गया और न इस पर इस बात के लिए दबाव डाला गया कि काम समय पर क्यों नहीं पूरा हो रहा है. जुर्माना वगैरा शब्द तो इसे ठेका देने वाले अधिकारीयों के शब्दकोष में ही नहीं थे.
अब कई राजनीतिक कूदेंगे. कोलकाता में चुनाव होने वाले हैं तो ये गिद्ध लाशों पर राजनीति का मौका छोडेंगे नहीं भले ही इनमे से किसी ने भी उस कम्पनी को ठेका देने या ठेके के बाद अनाप-शनाप रकम देने का विरोध कभी न किया हो.
जिन्होंने अपने खोये हैं वो लाशों से लिपट कर चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं- 'भगवान देख लेगा तुम्हे.'
तो देखता रहे!
परवाह किसे है?


No comments:

Post a Comment