Wednesday, April 20, 2016

आस्थाओं के अँधेरे में गुम भविष्य

अगर आंकड़ों को देखा जाए तो भारत के हर ५०० लोगों पर एक धार्मिक स्थल है. भारत के  धार्मिक स्थलों पर चढाया जाने वाला कुल धन और अर्थ भारत के एक बड़े हिस्से की निर्धनता दूर कर सकता है और ....
भारत के लोग विश्व इंडेक्स में ८३% धार्मिक हैं.
इसका अर्थ समझते हैं आप? इसका अर्थ ये हुआ कि अपने जीवन का या किसी एक खास दिन का ८३% हिस्सा हम धर्म या धार्मिक सोचने या करने में बिता देते हैं. समय और धन की बर्बादी का इससे खराब उदाहरण मुश्किल से ही मिलेगा. एक तथ्य और है- दोनों विश्वयुद्धों में मारे गए लोगों की संख्या अब तक धर्म या धार्मिक उन्माद या दंगों में मारे गए लोगों के लगभग बराबर हैं. तो इसका अर्थ ये हुआ कि पूरी दुनिया की लड़ाई एक तरफ और भारत की धार्मिकता एक तरफ.
यहाँ किसी खास धर्म की बात करना अर्थहीन होगा. किसी विशेष क्षेत्र, व्यक्ति या समाज की बात नहीं, बात वही है जो पहले भी हमेशा मैंने की है- बात भारत की है. पैसा हम धार्मिक स्थलों पर खर्च कर देंगे, समय हम धर्म की सोचने में बिता देंगे और मानवता धर्म के नाम पर दंगों की भेंट चढ़ा देंगे तो फिर ये धर्म कहाँ हुआ, अधर्म ही हुआ न!
वैसे तो धर्म को नितांत व्यक्तिगत माना जाता है पर सड़क घेर कर धार्मिक अनुष्ठान करना, लाउडस्पीकर लगा कर लोगों को रात भर जगाना और जुलुस के नाम पर शहर को रोक देना कौन सा उचित है?
कहीं कब्ज़ा करना है तो वहाँ एक धार्मिक स्थल बना दो, ये नीति है कई भारतीयों की.
और अंत में इसका लाभ होता है धार्मिक गुरुओं को. धार्मिक स्थल इनकी दुकान बन जाते हैं और धार्मिक लोग इनके 'शिकार'.इनको ठगना और इनका शोषण करना इनका धर्म. हालत ये है कि पकड़े जाने और जेल पहुँचने के बाद भी इनसे लोगों का मोहभंग नहीं होता. धार्मिक स्थलों पर कब्जों के लिए हत्याएं भी होती रहती हैं और बहुत से धार्मिक गुरु जो हमें मोहमाया से दूर और निर्भीक रहने का पाठ पढ़ाते रहते हैं, स्वयं सुरक्षा घेरे में कारों और हवाई जहाजों में घूमते रहते हैं.
धार्मिक होना कुछ गलत नहीं, अपने विश्वास और श्रद्धा को अपनी दुर्बलता न बनने दें. ईश्वर को किसी भी रूप में मानते हों, उसके नाम पर उसके किसी 'दलाल' को स्थान न दें. अपनी आँखें और मस्तिष्क को खुला रखें.
मुझे पता है कि ये विषय संवेदनशील है पर अपनी संवेदनाए भारत के सन्दर्भ से भी जोड़ें.
और आप पायेंगे कि जब भारत शक्तिशाली होता है तो आपको भी उत्थान का पूर्ण अवसर प्राप्त होता है.



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