हम दीवारों पर लघुशंका करते दिखाई पड़ जाते हैं.लड़कियों को अश्लीलता की हद तक घूरते,
कहीं भी गंदगी कूड़ा फेंकते...
कहीं भी थूकते...
गाली बकते..
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करते...
ट्रैफिक नियमों की धज्जियाँ उड़ाते...
रेलवे बैरियर उठा कर मोटरसाइकल निकालते..
सड़क घेर कर समारोह करते...
कतार में आगे जाने को झगड़ते...
लिस्ट अभी बहुत लंबी है पर सवाल ये है कि हम भारतीय कोई काम कायदे से तभी क्यों करते हैं जब हमारे ऊपर क़ानून या कोई और खौफ या 'डंडा' न हो? क्या हम भारतीयों की तरह भारत के बारे में नहीं सोच सकते? कोई देख रहा है या नहीं देख रहा है, हमें सजा हो जायेगी या अपमान हो सकता है, क्या बस यही ख्याल हमें कुछ ऐसा करने से रोक सकते हैं जो वास्तव में हमारे भारत की छवि को धूमिल करते हों? ये सब तो ऐसे कार्य हैं जिनके लिए आपको कोई बहुत बड़ा देशप्रेमी होने की आवश्यकता भी नहीं. कूड़ा कूड़ेदान में डालने में क्या परेशानी है या फिर सरे आम सड़कों पर गाली गलौज से कौन सी आपकी प्रतिष्ठा बढ़ती है?देश के लिए कुछ करने के लिए हर बार सेना में शामिल होना या सीमा पर गोली खाकर शहीद होना ही जरुरी नहीं है. आप देश में रहकर ही बहुत कुछ कर सकते हैं. या यूँ कहिये कि कुछ ऐसा नहीं कर सकते जो आपके देश और समाज के लिए अच्छा न हो. साथ ही आप औरों को भी ऐसा कुछ करने या 'न करने' के लिए प्रेरित कर सकते हैं वो भी महज नम्रता से निवेदन करके. चूँकि बात हमारे देश की है तो छोटे छोटे प्रयास ही एक बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं.
शुरुआत तो कीजिये!


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