कहा जाता है कि भारत कभी सोने की चिड़िया था लेकिन विदेशी आक्रमणकारी हमारा धन और ऐश्वर्य लूट कर ले गए. अब तो दुनिया के गरीबों और भुखमरों का एक बड़ा प्रतिशत भारत में रहता है.
अभी बैठे बैठे पेपर पढ़ते हुए एक खबर देखी कि एक साधारण से सरकारी चपरासी के घर में छापा पड़ा तो उसके पास ३६ करोड़ की संपत्ति पकड़ी गई. फिर एक सरकारी इंजिनियर के घर छापे की खबर देखी. उसके
पास करीब १००० करोड़ की संपत्ति का अनुमान है .
मेरा माथा ठनका. केवल दो लोगों के पास ही इतनी संपत्ति है तो भारत में तो ऐसे भ्रष्टाचारियों की भरमार है. जाने अनजाने मन में ये हिसाब आने लगा कि अगर इन सबकी कुल संपत्ति मिला दी जाए तो कितनी होगी.
आइये आप भी मेरा ये हिसाब देखिये. शुरुआत एक जिले में इस प्रकार आमदनी करने वाले भ्रष्ट लोगों से करते हैं.
सबसे पहले सफेदपोश यानि समाज में रसूख बना कर रहने वाले और सभी तरह के अवैध धंधों में लिप्त लोगों से. इनके पुलिस और राजनीतिज्ञों दोनों से अच्छे सम्बन्ध होते हैं और इन्ही के बल पर ये रोज और अमीर होते जाते हैं.
तो मान लीजिए आपके जिले में ऐसे केवल दस लोग हैं जो प्रति माह १ करोड़ की अवैध आमदनी करते हैं.
पाँच ऐसे नेता हैं जो हर महीने १ करोड़ आराम से डकार जाते हैं.
टैक्स में खेल करके काले को सफ़ेद बनाने वाले कम से कम १० ऐसे व्यापारी भी हैं जिसमे से प्रत्येक प्रतिमाह १० लाख का तो खेल कर ही लेता है.
कम से कम १०० ऐसे सरकारी कर्मचारी जो ऐसे पदों पर बैठे हैं जहाँ से वो 'काम बनवाने', भुगतान देने, ठेका दिलवाने आदि के नाम पर प्रतिमाह १ लाख कमा जाते हैं.
केवल ५ ऐसे पुलिस अधिकारियों को भी जोड़ लिया जाए जो हर माह करीब २० लाख कमा लेते हैं.
आइये जोड़ें.
सफेदपोश -१० करोड़
नेता - ५ करोड़
व्यापारी - १ करोड़
सरकारी कर्मचारी - १ करोड़
पुलिस - १ करोड़
-----------------------------------------------------
कुल १८ करोड़
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ये तो मात्र एक मोटा मोटा हिसाब है और आप सभी जानते हैं कि खेल इससे बहुत ऊपर का होता है. चलिए इधर-उधर के २ करोड़ और जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं २० करोड़. भारत में इस समय ६८८ जिले हैं तो अगर २० को ६८८ से गुणा की जाए तो बनता है १३७६० करोड़.
मतलब करीब १४ हजार करोड़ तो वो रकम है जो हर माह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है. वर्षभर में ये आँकड़ा करीब एक लाख करोड़ का बैठता है. इसमें किसी भी बड़े 'राष्ट्रीय' स्तर के घोटाले को नहीं जोड़ा गया है जहाँ ये 'आधे' घोटाले के बराबर की हो सकती है.
तो मेरा दिल तो यही कहता है कि भारत अब भी खासा पैसे वाला देश है. बस आवश्यकता है इसके सही जगह पर होने की. सही कोशिश की जाए तो ऐसा हो सकता है.
पर कोशिश करने वालों की अपनी तिजोरियां काले रंग में रंगी हुई हैं तो भला कौन प्रयत्न करेगा?
अभी बैठे बैठे पेपर पढ़ते हुए एक खबर देखी कि एक साधारण से सरकारी चपरासी के घर में छापा पड़ा तो उसके पास ३६ करोड़ की संपत्ति पकड़ी गई. फिर एक सरकारी इंजिनियर के घर छापे की खबर देखी. उसके
पास करीब १००० करोड़ की संपत्ति का अनुमान है .
मेरा माथा ठनका. केवल दो लोगों के पास ही इतनी संपत्ति है तो भारत में तो ऐसे भ्रष्टाचारियों की भरमार है. जाने अनजाने मन में ये हिसाब आने लगा कि अगर इन सबकी कुल संपत्ति मिला दी जाए तो कितनी होगी.
आइये आप भी मेरा ये हिसाब देखिये. शुरुआत एक जिले में इस प्रकार आमदनी करने वाले भ्रष्ट लोगों से करते हैं.
सबसे पहले सफेदपोश यानि समाज में रसूख बना कर रहने वाले और सभी तरह के अवैध धंधों में लिप्त लोगों से. इनके पुलिस और राजनीतिज्ञों दोनों से अच्छे सम्बन्ध होते हैं और इन्ही के बल पर ये रोज और अमीर होते जाते हैं.
तो मान लीजिए आपके जिले में ऐसे केवल दस लोग हैं जो प्रति माह १ करोड़ की अवैध आमदनी करते हैं.
पाँच ऐसे नेता हैं जो हर महीने १ करोड़ आराम से डकार जाते हैं.
टैक्स में खेल करके काले को सफ़ेद बनाने वाले कम से कम १० ऐसे व्यापारी भी हैं जिसमे से प्रत्येक प्रतिमाह १० लाख का तो खेल कर ही लेता है.
कम से कम १०० ऐसे सरकारी कर्मचारी जो ऐसे पदों पर बैठे हैं जहाँ से वो 'काम बनवाने', भुगतान देने, ठेका दिलवाने आदि के नाम पर प्रतिमाह १ लाख कमा जाते हैं.
केवल ५ ऐसे पुलिस अधिकारियों को भी जोड़ लिया जाए जो हर माह करीब २० लाख कमा लेते हैं.
आइये जोड़ें.सफेदपोश -१० करोड़
नेता - ५ करोड़
व्यापारी - १ करोड़
सरकारी कर्मचारी - १ करोड़
पुलिस - १ करोड़
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कुल १८ करोड़
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ये तो मात्र एक मोटा मोटा हिसाब है और आप सभी जानते हैं कि खेल इससे बहुत ऊपर का होता है. चलिए इधर-उधर के २ करोड़ और जोड़ लिए जाएँ तो बनते हैं २० करोड़. भारत में इस समय ६८८ जिले हैं तो अगर २० को ६८८ से गुणा की जाए तो बनता है १३७६० करोड़.
मतलब करीब १४ हजार करोड़ तो वो रकम है जो हर माह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है. वर्षभर में ये आँकड़ा करीब एक लाख करोड़ का बैठता है. इसमें किसी भी बड़े 'राष्ट्रीय' स्तर के घोटाले को नहीं जोड़ा गया है जहाँ ये 'आधे' घोटाले के बराबर की हो सकती है.
तो मेरा दिल तो यही कहता है कि भारत अब भी खासा पैसे वाला देश है. बस आवश्यकता है इसके सही जगह पर होने की. सही कोशिश की जाए तो ऐसा हो सकता है.
पर कोशिश करने वालों की अपनी तिजोरियां काले रंग में रंगी हुई हैं तो भला कौन प्रयत्न करेगा?


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