Sunday, April 3, 2016

करोड़ों की गरीब सरकारी शिक्षा

एक विद्यार्थी को बेहतर कौन बना सकता है? एक स्कूल, महंगी फीस या फिर शिक्षक?
मेरे विचार में आप सभी का उत्तर शिक्षक ही होगा. होना भी चाहिए. आखिरकार न तो एक शानदार स्कूल, न महंगी फीस और न खुद किताबें विद्यार्थी को आगे बढ़ा सकती हैं जबकि एक समर्थ शिक्षक कम से कम स्त्रोतों से ये संभव कर के दिखा सकता है.
अधिकाँश भारतीय प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों का जम कर शोषण होता है. उन्हें कम तनख्वाह पर अधिकाधिक काम करना पड़ता है. साथ ही इस बात का दबाव भी होता है कि स्कूल का परिणाम अच्छा रहे ताकि ज्यादा बच्चे स्कूल की ओर आकर्षित हों और उनकी शिक्षा की 'दूकान' बेहतर रूप में चल सके. शहर के कई स्कूलों में तो लाखों रूपये फीस होने के बावजूद लोग बड़ी बड़ी सिफारिशें लेकर आते हैं कि उनके बच्चे को उस स्कूल में दाखिला मिल जाए.
आइये अब सरकारी स्कूलों पर भी एक नज़र डाल लें. यहाँ के शिक्षकों को प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों के मुकाबले कम से कम दोगुनी या तीन गुनी तनख्वाह मिलती है और इतना दबाव भी नहीं होता पर हालत ये है कि स्कूल में सौ बच्चे भी मुश्किल से आते हैं.
इसकी वजह? वजह स्पष्ट है. यहाँ के शिक्षक को अपनी नौकरी खोने का कोई डर नहीं होता. कुछ शिक्षकों ने तो तनख्वाह देकर 'नौकर शिक्षक' रख रखे हैं जो उनकी जगह जाकर पढ़ाते हैं और वो खुद घर बैठने की पूरी तनख्वाह पाते हैं. कुछ बस उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने जाते हैं और कुछ स्कूलों में इस काम की भी बारी लगती है मतलब एक शिक्षक सबके हस्ताक्षर कर देता है.
अगर कुछ जाते भी हैं तो उनके लिए स्कूल शिक्षा देने का नहीं, गपियाने और सैरगाह का स्थान होता है. यही वजह है कि प्राइवेट स्कूल उनसे बहुत आगे निकल जाते हैं. वो भी तब जबकि वो इन शिक्षकों का दोहन करते हैं.
मै ये नहीं कहता कि सरकारी स्कूलों में भी शिक्षकों का शोषण किया जाए लेकिन कम से कम उनकी जवाबदेही तो तय की जाए. जब करोड़ों रूपये इन शिक्षकों की तनख्वाह के रूप में बांटे जा रहे हैं तो उनसे पूछने का हक भी बनता है कि अभी तक वहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा का स्तर दिन पर दिन गिरता क्यों जा रहा है?
अब सवाल ये है कि ये पूछेगा कौन? स्कूल न जाने वाले शिक्षकों के पास शिक्षा विभाग के क्लर्क का फोन एक दिन पहले आ जाते है-
'कल साहब आ रहे हैं चेक करने. स्कूल टाइम पर पहुँच जाना.' शिक्षक की मनचाही पोस्टिंग, उसकी तनख्वाह और स्कूल के आबंटन तक में रिश्वत चलती है और चलती रहती है. तो जिन्हें जवाब माँगना चाहिए वो 'रिश्वत' मांग कर काम चला रहे हैं.
तो किस दम पर ये करोड़ों की दुल्हन 'अमीर' बनेगी?



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