अभी कुछ दिनों पहले काले धन से जुड़े 'पनामा फोसेंका' नाम के कुछ गोपनीय कागजात लीक हुए हैं. इनमे विश्व भर के नेताओं, उद्योगपतियों और नामचीन हस्तियों के नाम हैं और उनमे से कुछ भारत की भी हैं. वैसे ये 'कुछ' भी ५०० के करीब हैं और इनमे से अगर प्रत्येक ने केवल १००० करोड़ भी जमा किये हों तो ये इतनी रकम बनती है कि भारत के बड़े हिस्से को पल्लवित किया जा सकता है.
कुछ वर्षों पहले ऐसा ही खुलासा विकिलीक्स ने किया था जिसमे विश्व भर की कूटनीतिक चालें दिखाई गई थीं.
इन दोनों खुलासों के सन्दर्भ में भारत में तो बस एक ही प्रतिक्रिया होती है-
'रखो ये कचरा कागजातों का बण्डल अपने पास और भाड़ में जाओ.'
कुछ लोग शोर मचाते हैं पर फिर वो 'पता नहीं कैसे' चुप होकर बैठ जाते हैं. वैसे भी खुलासे के बाद सबको पता होता है कि अगर ज्यादा शोर मचाया तो गाज उन पर गिर सकती है. काला धन किसके पास नहीं, राजनीतिक कमीनापन किसको भला नहीं छूकर गया है, ऊपर चढ़ने के लिए कौन जोड़ तोड़ और अपराध का सहारा नहीं ले रहा? तो फिर कौन किसे दोषी साबित करे? खास तौर पर तब जब सबको एक दूसरे की असलियत मालूम हो?
भारत में तो हालत ये है कि किसी का स्टिंग ऑपरेशन हो जाए जो मेरे विचार में दोषी के लिए एक पक्के सबूत की तरह काम कर सकता है, पर उस व्यक्ति को केवल 'बर्खास्त' किया जाता है. पता नहीं ये सजा होती है या इनाम क्योंकि ऐसा करने से वो व्यक्ति जनता की याददाश्त से जल्दी ही दूर चला जाता है.
पर इसमें भी एक बेहतर पक्ष है. यहाँ हमारी सहनशीलता, धैर्य और सहयोग की भावना अपने चरम पर पहुँच जाती है.
यही तो हमारी परंपरा है.
कुछ वर्षों पहले ऐसा ही खुलासा विकिलीक्स ने किया था जिसमे विश्व भर की कूटनीतिक चालें दिखाई गई थीं.
इन दोनों खुलासों के सन्दर्भ में भारत में तो बस एक ही प्रतिक्रिया होती है-
'रखो ये कचरा कागजातों का बण्डल अपने पास और भाड़ में जाओ.'
कुछ लोग शोर मचाते हैं पर फिर वो 'पता नहीं कैसे' चुप होकर बैठ जाते हैं. वैसे भी खुलासे के बाद सबको पता होता है कि अगर ज्यादा शोर मचाया तो गाज उन पर गिर सकती है. काला धन किसके पास नहीं, राजनीतिक कमीनापन किसको भला नहीं छूकर गया है, ऊपर चढ़ने के लिए कौन जोड़ तोड़ और अपराध का सहारा नहीं ले रहा? तो फिर कौन किसे दोषी साबित करे? खास तौर पर तब जब सबको एक दूसरे की असलियत मालूम हो?
भारत में तो हालत ये है कि किसी का स्टिंग ऑपरेशन हो जाए जो मेरे विचार में दोषी के लिए एक पक्के सबूत की तरह काम कर सकता है, पर उस व्यक्ति को केवल 'बर्खास्त' किया जाता है. पता नहीं ये सजा होती है या इनाम क्योंकि ऐसा करने से वो व्यक्ति जनता की याददाश्त से जल्दी ही दूर चला जाता है.
पर इसमें भी एक बेहतर पक्ष है. यहाँ हमारी सहनशीलता, धैर्य और सहयोग की भावना अपने चरम पर पहुँच जाती है.
यही तो हमारी परंपरा है.

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