Friday, May 6, 2016

अब भी उतने ही अंधविश्वासी

'छींक आ गई तो रुक जाओ अभी'
'कांच टूटना अशुभ है.'
'तेरहवीं मंजिल पर मकान नहीं लेंगे.'
'बिल्ली रास्ता काट गई. थोड़ी देर बाद निकलना.'
इतने, इतने, इतने समय बाद भी हम उतने ही अंधविश्वासी हैं जितने सैकड़ों वर्ष पहले हुआ करते थे. तकनीक आ गई है और हम हम कहीं ज्यादा वैश्विक हो गए हैं. तो हमने इस वैश्विकता से क्या सीखा? सीखा न! अब हमने  विश्व भर के अंधविश्वासों को अपने दैनिक जीवन में शामिल कर लिया है.
मुझे कभी इस अन्धविश्वास का कारण नहीं समझ आया. मुझे तो लगता है कि अगर आप किसी भी प्रकार से ईश्वर में विश्वास करते हैं और उसे सर्वशक्तिमान मानते हैं तो फिर आप किसी भी प्रकार की 'होनी' या 'अनहोनी' को कैसे बदल सकते हैं? अगर आप ऐसा करने का प्रयास भी कर रहे हैं तो ये परोक्ष रूप से ईश्वर की सत्ता में दखल ही हुआ.
शादी होगी, कुंडली देख कर. दुकान खुलेगी, मुहूर्त देख कर. नेताजी चुनाव का परचा भरेंगे, शुभ लग्न में. गंडे, तावीज़, पत्थर, धागा, टोटका, मन्त्र, झाड़-फूंक क्या उपाय नहीं करते हम केवल इसलिए कि हम उन सभी दुर्योगों से बच जाएँ जो हम पर आने वाले हैं. परिणाम यही होता है कि हमें हमारे भविष्य के दुर्भाग्य से बचाने या कम से कम उसकी मार का असर कम करने वाले 'ठेकेदारों' की फ़ौज खड़ी हो गई है. इनकी कोई जवाबदेही नहीं होती, ये आपको इस प्रकार से बातें बताते हैं कि भविष्य में उन शब्दों के कई अर्थ बनने की गुंजाईश बनी रहे. लागत कुछ नहीं और मुनाफा चकाचक.
फिर से सोचिये, ईश्वर की इच्छा हम बदल नहीं सकते और आने वाले दुर्भाग्य या सौभाग्य किसी को भी टाल नहीं सकते. हम तो बस एक काम कर सकते हैं, वो है अपना कर्म. अगर किसी भी प्रकार से आने वाला बुरा वक़्त टल सकता तो आज कोई भी भारतीय किसी भी प्रकार से दुखी ना होता और न ही किसी पर कोई विपदा आई होती. अन्धविश्वास, एक तर्कहीन और बेतुका विश्वास है जो हमारे मस्तिष्क में भय बन कर वास करता है. इससे न केवल हमारा जीवन बल्कि हमसे जुड़े लोगों का जीवन भी प्रभावित होता है. ध्यान रखिये, अच्छे काम शुरू करने के लिए कोई भी मुहूर्त शुभ होता है और गलत काम की शुरुआत के लिए कोई भी समय सही नहीं होता.
उम्मीद है आप सोचेंगे जरूर. भले ही उस काली बिल्ली के आँखों से ओझल हो जाने के बाद.





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