Monday, September 3, 2018

सामान्य वर्ग का चमत्कारी पुरुष

यदि आप पुरुष हैं...
यदि आप सामान्य वर्ग से हैं..
यदि आप परिवार चलाने लायक कमा रहे हैं.....
तो ये मानिए कि रोज कम से कम १०० रूपये का प्रसाद तो मंदिर में चढ़ा ही दिया करें क्योंकि आप जेल से बाहर हैं, यही कम नहीं है.
ज़रा सोचिये अभी एक व्यक्ति आपकी ओर ऊँगली उठा कर आरोप लगा दे कि
'इसने मुझे जातिसूचक शब्द कहे'....
या फिर कोई भी महिला बोल दे-
'इसने मेरे साथ बलात्कार किया'
और तो और आपकी अपनी पत्नी या उसके घर वालों में से कोई शादी के बीस साल बाद भी कह दे कि आप उनसे दहेज मांग रहे हैं तो आपसे पूछताछ बाद में होगी, पहले आपको जेल में ठूंस दिया जाएगा.
और ये सीधे सीधे गुंडागर्दी वाले कानूनों में ताकत इतनी है कि कोई सरकार इन्हें हटा तो क्या, हिला भी नहीं पाई है. आपमें से कुछ लोग पार्टियों के नज़रिए से इसे देखेंगे तो कुछ सामजिक समरसता जैसी बात करेंगे. तो आप लोगों से अनुरोध है कि कान किधर से पकड़ लें....सच्चाई ज़रा नहीं बदलने वाली.
ज़रा सोचिये, क्या गुज़रती होगी उस व्यक्ति पर जो सवर्ण है और पुरुष है. देखा जाए तो सबसे असुरक्षित है वो. क्रोध करने का तो अधिकार खत्म ही हो गया उसका, कभी भी कोई भी आकार उसकी इज्ज़त उतार दे फिर वो भले ही उसकी अपनी पत्नी ही क्यों न हो.
और ये भी वही सिद्ध करे कि वो निर्दोष है. 
यही नहीं, परेशानियां और भी हैं. आप कमा रहे हैं, ये भी चमत्कार से कम नहीं है. आपकी जबरदस्त मेधा का चमत्कार ही है कि आप एक तगड़ी प्रतियोगिता जीत कर यहाँ पहुँच गए. उनकी छोड़ दें जो ४०% पाकर भी आपसे ऊँची नौकरियां पा गए. वो तो प्रमोशन भी आपसे पहले पा लेंगे. 
कल कुछ बेहतर होगा, ये सोचना छोड़ दें. आपकी आने वाली संताने भी इसी भय के साये में पलेंगी.